Sunday, 13 January 2013

बवंडर !!!


खून है जो खोलता
जमीर है जो बोलता
हाथों में हथियार नहीं
शब्दों से ही बोलता

सुनते हैं ये आज हम
जो ना किसीने है सुना
किसी ने फिर से है किया
आत्मा को अधमरा

सुनते ही बातें उसकी
साँसे हैं जो थम गयीं
बिजली ऐसे है गिरी
आग तन में लग गयी

विचलित हो ये मन मेरा
पूछता है मुझसे अब
आम हो गया है ये
दुनिया का कुछ ऐसा ढंग

कभी तो राम राज था
कभी अहिंसा का ठिठोलापन
कभी कहीं पे जंग थी
यहीं देखा दंगो का रंग

देखें थे ये सपने
जिसने भारत--आजाद के
देखतें हैं वो आज जब
सीना उनका है फटा

हाथों में हथियार नहीं
इसलिए शब्दों से ही बोलता
खून है जो खोलता
जमीर है जो बोलता...

Saturday, 5 January 2013

Tribute to Delhi Rape Victim.....मेरा बलिदान

These lines have been carved when she died after raped brutally by bunch of monsters who were wearing the clothing of human body. These lines are tribute to every another girl who have been victim and message to the society in their voice and they call it..... मेरा बलिदान .....
 
धध धधकती आग में
जल रहा था जिस्म मेरा,
रास्ता था मेरा
राक्षसों से है भरा.

मगर मैं रुकी नहीं
और मैं झुकी नहीं,
जिस्म को झिंझोड़ा था
आत्मा है मरा.

आज कहती हूँ मैं
तुमसे हो अलविदा,
मृत्यु मेरी थी नहीं
बलिदान है ये मेरा.

भूलना ना तुम इसे
इतिहास है जो बना,
ऐसे राक्षसों को तुम
छोड़ना ना यूँ खुला...